• मौजूद समय में बीमा कंपनियां गाड़ी की वैल्यू के लिए बेहद इतनर पेचीदा प्रक्रिया अपनाती हैं हर कोई इसे समझ नहीं पाता
  • नए ड्राफ्ट में डेप्रिसिएशन और बीमा राशि की गणना को बेहद आसान आसान बनाया गया है

दैनिक भास्कर

Nov 27, 2019, 11:36 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. बीमा विनियामक इरडा ने मोटर वाहनों की बीमा राशि की गणना के लिए फॉर्मूला पेश किया है। प्रोडक्ट स्ट्रक्चर फॉर मोटर ओन डैमेज कवर पर गठित वर्किंग ग्रुप ने इरडा को निजी कारों की बीमा राशि की गणना के लिए दो विकल्पों की सिफारिश की है। इस संबंध में इरडा ने ड्राफ्ट जारी कर दिया है। वर्किंग ग्रुप की ओर से की गई सिफारिश के तहत निजी कारों पर पहले तीन साल तक बीमा कंपनियां समान वैल्यू की बीमा राशि देंगी। यह बीमा राशि कार की पहले दिन की ऑन रोड प्राइस के बराबर होगी, जिसमें इनवॉयस वैल्यू, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस और निर्माता की ओर से गाड़ी में लगाई गई एसेसरीज शामिल है।

नए ड्राफ्ट के तहत बीमा की गणना

दूसरे विकल्प के अनुसार 7 साल के बाद बीमा राशि या डेप्रिसिएशन रेट को लेकर बीमा कंपनी के साथ मोलभाव किया जा सकता है। वहीं पहले विकल्प में मोलभाव का विकल्प नहीं मिलेगा। इरडा ने ड्राफ्ट में दोपहिया वाहनों के लिए भी उम्र आधारित डेप्रिसिएशन पॉलिसी जारी की है।

वाहन की उम्र डेप्रिसिएशन
पहले तीन साल तक 00 फीसदी
3 से चार साल तक 40 फीसदी
4 से पांच साल तक 50 फीसदी
5 से 6 साल तक 55 फीसदी
6 से 7 साल तक 60 फीसदी

वाहन की उम्र बीमा राशि
6 महीने तक 95%
6 महीने से 1 साल तक 90%
1 साल से 2 साल तक 80%
2 से 3 साल तक 70%
3 से 4 साल तक 60%
4 से 5 साल तक 50%
5 से 6 साल तक 45%
6 से सात साल तक 40%

कार, वाहन और कॉमर्शियल वाहनों के लिए अलग-अलग मॉडल के अलावा वर्किंग ग्रुप ने सभी वाहनों के लिए भी स्टैंडर्ड मॉडल पेश किया है। इसके तहत बीमा राशि वाहन की उम्र के हिसाब से 95 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक रखी गई है।

वाहन की उम्र बीमा राशि
6 महीने तक 95%
6 महीने से 1 साल तक 90%
1 साल से 2 साल तक 80%
2 से 3 साल तक 70%
3 से 4 साल तक 65%
4 से 5 साल तक 60%
5 से 6 साल तक 55%
6 से सात साल तक 50%
7 से 10 साल तक 45%
10 से 15 साल तक 40%
15 साल के बाद 30%



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