• वकील रीपक कंसल ने याचिका दाखिल की थी, कहा था- रजिस्ट्री अधिकारी प्रभावशाली वकीलों को प्राथमिकता देते हैं
  • सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नाराजगी जताई, कहा- रजिस्ट्री अधिकारी याचिकाकर्ताओं के भले के लिए दिन-रात काम करते हैं

दैनिक भास्कर

Jul 06, 2020, 06:45 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केसों की लिस्टिंग में पक्षपात का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एसए नजीर की बेंच ने ऐसी याचिका दाखिल करने के लिए रीपल कंसल पर 100 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

बेंच ने कहा था कि इस तरह की याचिकाओं का ट्रेंड बन गया है। रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी याचिकाकर्ताओं और वकीलों के फायदे के लिए दिन-रात काम करते हैं।

बेंच ने कहा- आरोपों में कोई आधार नहीं

कंसल ने कहा था कि तकनीकी खामी की वजह से बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना फैसला नहीं सुनाया। बेंच ने फोन पर इस फैसले की जानकारी दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों में कोई आधार नहीं है। कंसल ने अपनी याचिका में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री अधिकारी केसों की लिस्टिंग के दौरान प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकार्ताओं को प्राथमिकता देते हैं। 

रजिस्ट्री को निर्देश देने की अपील की गई थी

याचिका में मांग की की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे कि ऐसे मुश्किल वक्त में जब वर्चुअल कोर्ट चलानी पड़ रही है, तब प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकर्ताओं के मामलों की लिस्टिंग को प्राथमिकता न दी जाए। इसके अलावा सेक्रेटरी और अन्य अधिकारियों को भी निर्देश दिए जाएं कि कम प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकर्ताओं से भेदभाव बंद किया जाए।

पक्षपात करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का कोई मैकेनिज्म नहीं- याचिकाकर्ता
याचिका में कहा गया था कि ऐसे रजिस्ट्री अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोई व्यवस्था नहीं है, जो लॉ फर्म, वकीलों के पक्ष में काम करते हैं और इसकी वजह ऐसे अधिकारी ही बता सकते हैं। इन अधिकारियों से कहा जाए कि साधारण वकीलों और याचिकाकर्ताओं के मामलों में बेवजह खामी न निकालें। इसके अलावा अतिरिक्त कोर्ट फीस और अन्य शुल्क वापस किए जाएं। बेंच ने 19 जून को भी इस मामले पर सुनवाई की थी। लेकिन, तब फैसला सुरक्षित रख लिया था।



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