• गुरदासपुर जिले के गांव भोजराज के रहने वाले सतनाम सिंह अपने परिवार में 24 साल सेना की सेवा करने वाले पहले सैनिक थे
  • सतनाम सिंह से प्रेरित हो छोटा भाई सुखचैन सिंह भी फौज में भर्ती हुआ, वहीं सतनाम पिछले साल हुए थे पदोन्नत

दैनिक भास्कर

Jun 18, 2020, 07:12 PM IST

गुरदासपुर. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर हुई झड़प में शहीद हुए नायब सूबेदार सतनाम सिंह का गुरुवार को उनके पैतृक गांव भोजराज में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले सेना का हेलीकॉप्टर पार्थिव शरीर को लेकर तिबड़ी कैंट पहुंचा, वहां से फूलों से सजी हुई गाड़ी में गांव तक लाया गया। दोपहर बाद करीब 4 बजे शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा, सुबह से अंतिम दर्शन को लालायित परिजन और ग्रामीण उमड़ पड़े। शहीद सतनाम सिंह की पत्नी और बेटी उनके अंतिम दर्शन के बाद बेसुध हो गई।

42 वर्षीय शहीद सतनाम सिंह फाइल फोटो, जिसे देख-देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

दरअसल, सोमवार देर रात लद्दाख प्रांत की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के हमले के बाद उनसे लोहा लेते हुए देश के विभिन्न राज्यों के 20 जवान शहीद हो गए। इनमें एक नाम गुरदासपुर जिले के गांव भोजराज के 42 वर्षीय सतनाम सिंह का भी है। वह पंजाब रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर देशसेवा को समर्पित थे। उनके छोटे भाई सुखचैन सिंह ने बताया कि वह खुद भी फौजी हैं और उन्होंने यह सेवा अपने भाई की प्रेरणा से जॉइन की थी। उनके अलावा सतनाम सिंह अपने पीछे बेटा प्रभजोत सिंह (16), बेटी संदीप कौर (17), पत्नी जसविंदर कौर, पिता जागीर सिंह और माता जसबीर कौर को छोड़ गए हैं।

शहीद का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे हेलीकॉप्टर से घर तक अंतिम दर्शन के लिए लेकर जाते सैनिक।

24 साल तक सेना में सेवा निभाने वाले सतनाम सिंह परिवार में पहले सैनिक थे, जो पिछले साल ही नायब सूबेदार बने थे। वह दो माह की छुट्‌टी काटने के बाद 16 मार्च को घर से रवाना हुए थे और 22 मार्च को उनकी दिल्ली से लेह के लिए फ्लाइट थी। अभी सोमवार को ही उनकी भाई सुखचैन से बात हुई थी। किसे पता था यह उनका अंतिम फोन होगा।

शहीद सतनाम सिंह की पत्नी और बेटी को सांत्वना देते गांव के लोग।

शहीद के फौजी भाई सुखचैन सिंह ने खुला चैलेंज दिया है कि अगर चीन के खिलाफ जंग में उन्हें भेजा गया तो वह अपने भाई की शहादत का बदला जरूर लेंगे।

शहीद के अंतिम दर्शन को उमड़ी ग्रामीणों और आसपास के लोगों की भारी भीड़।

गांव में सबसे पहले शहीद के पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया और इसके बाद लोगों के अंतिम दर्शन के लिए ले रखा गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को श्‍मशान ले जाया गया। अंतिम यात्रा के समय लोग शहीद की अमरता के नारे लगा रहे थे। इस दौरान लोगों ने चीन के प्रति गुस्‍से का इजहार किया। लोगों ने चीन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। श्‍मशान में सेना और पुलिस के जवानों ने शहीद सतनाम सिंह के पा‍र्थिव शरीर को सलामी दी। इसके बाद पुत्र ने चिता को मुखाग्नि दी और सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।



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