• 1972 में सेंसर बोर्ड ने हरी झंडी दे दी, लेकिन विदेश मंत्रालय ने तनाव बढ़ाने वाली खतरनाक फिल्म बताते हुए रोक लगा दी

दैनिक भास्कर

Jun 18, 2020, 09:14 AM IST

जयपुर. (ईशमधु तलवार) 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि और भारतीय परिवारों पर चीनी फौज के जुल्मों पर जयपुर के फिल्म निर्माता जगन शर्मा ने एक फिल्म बनाई थी-“भूल ना जाना।’ दान सिंह के संगीत से सजी इस फिल्म को बनने में करीब 10 साल लग गए।

जब तक फिल्म बनी तब तक भारत-चीन के संबंध सुधर चुके थे और ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा चल पड़ा था। ऐसे में फिल्म सेंसर बोर्ड से तो 1972 में पास हो गई, लेकिन विदेश मंत्रालय ने यह कहते हुए फिल्म पर रोक लगा दी कि यह फिल्म रिलीज हुई तो दोनों देशों के रिश्ते फिर से खराब हो जाएंगे।

क्या थी कहानी; तिब्बत में रह रहे दो भारतीय परिवारों का दर्द

ईशमधु बताते हैं- फिल्म “भूल न जाना” दरअसल तिब्बत में रह रहे दो भारतीय परिवारों की कहानी थी, जिन पर चीनी फौजियों के अत्याचार दिखाए गए हैं। इनमें एक परिवार जगन शर्मा का था, जो फिल्म निर्माता होने के साथ ही इसमें नायक भी थे और दूसरा एक डॉक्टर का, जिसकी भूमिका में पिंचू कपूर थे।

जगन के पुत्र प्रदीप शर्मा (टूटू) ने इसमें बाल कलाकार और किशोर की भूमिका निभाई थी। ये वही टूटू हैं, जिनका आगे चलकर अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे से विवाह हुआ। मेरी टूटू शर्मा से मुम्बई फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि इस फिल्म का अब कुछ भी नहीं बचा है।

तिब्बत में चीनी फौज के अत्याचारों से त्रस्त नायक जगन शर्मा का फिल्म में एक संवाद था, जिसमें वे कहते हैं कि हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा केवल एक छलावा है और यह मुल्क अब हमारे रहने लायक नहीं रह गया है।

म्यूजिकल हिट; इस फिल्म के लिए गुलजार व जयपुर के हरिराम के लिखे गीत पॉपुलर हुए थे

फिल्म तो रिलीज नहीं हो पाई, पर 70 के दशक में जब इसके गाने बजे तो जमकर धूम मचाई। दान सिंह के संगीत निर्देशन में गुलजार के लिखे और मुकेश के गाए गीत “पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो” ने फिल्म संगीत को नई कविताई और धुन दी। इसमें गीता दत्त के गाए गीत-मेरे हमनशीं मेरे हमनवां मेरे पास आ मुझे थाम ले… की कशिश आज भी कम नहीं हुई है।

यह गीत जयपुर के हरिराम आचार्य ने लिखा था। आचार्य ने एक गजल भी लिखी, जो मुकेश ने गाई- गम-ए-दिल किससे कहूँ, कोई भी गम खार नहीं, हैं सभी गैर यहां…। इसके अलावा उन्होंने रोमांटिक गीत- गोरा-गोरा मुखड़ा ये तूने कहां से पाया है, तू है गोरी चोर, तूने चांद से चुराया है, भी लिखा। इसमें जोधपुर निवासी कमला कछावा नायिका थीं।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here