• सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि एलएसी के पास चीन के हेलिकॉप्टर लगातार एविएशन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं
  • चीन का मीडिया यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सीमा पर चीन किसी भी समय अपने सैनिक और हथियार इकट्ठा कर सकता है

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 11:06 PM IST

लेह. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं में जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत की जा रही है। लेकिन, दोनों सेनाओं के कमांडरों के बीच बातचीत के महज दो दिन बाद सोमवार को ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास चीन के हेलिकॉप्टर नजर आए। यह घटना दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की 6 जून को हुई मुलाकात के मजह दो दिन बाद हुई है। सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत की थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बीते 7-8 दिनों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के हवाई बेड़े की गतिविधियां ज्यादा बढ़ गई हैं और उसके हेलिकॉप्टर लगातार नजर आ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि हो सकता है कि सीमा के करीब कई इलाकों में तैनात चीन के सैनिकों को मदद पहुंचाने के लिए ये हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे हों।

दोनों देश बातचीत के जरिए मुद्दों को हल करने पर नजर बनाए हैं: चीनी राजदूत

भारत में चीन के राजदूत ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि चीनी और भारतीय सैन्य अधिकारियों ने 6 जून को बैठक के दौरान सीमा क्षेत्रों की स्थिति पर चर्चा की। राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए दोनों देश सीमा मुद्दों को हल करने पर बात कर रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में आमतौर पर स्थिर नियंत्रण में रहती है। चीन और भारत बातचीत के जरिए इन मुद्दों को हल करने की इच्छुक हैं।

रक्षा मंत्री को एलएसी के ताजा हालातों की जानकारी दी गई 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भारतीय सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख सेक्टर में एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) के ताजा हालातों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान सीडीएस प्रमुख बिपिन रावत और तीनों सेवाओं के प्रमुखों ने भाग लिया। सूत्रों ने कहा कि रक्षा मंत्री को मोल्दो में दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच हुई वार्ता की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि विवाद को खत्म करने के लिए चीन के साथ बातचीत जारी है।

गलवान घाटी में भारतीय कंस्ट्रक्शन साइट के ऊपर भी उड़ान भरी थी
सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच टकराव और तनाव की स्थिति के बीच चीन के हेलिकॉप्टर कई बार भारतीय इलाकों में भी नजर आए। ये गलवान घाटी में भारतीय कंस्ट्रक्शन साइट के ऊपर भी उड़ान भरते देखे गए थे।

इंडियन एयरफोर्स को भेजने पड़े थे फाइटर जेट
सूत्रों ने बताया कि चीन लगातार अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों का उल्लंघन कर रहा है और वह भारतीय इलाकों में चॉपर्स के जरिए निगरानी रख रहा है। मई के शुरुआती दिनों में भी चीन के हेलिकॉप्टरों की ऐसी गतिविधियों के बाद भारतीय एयरफोर्स ने अपने फाइटर जेट्स बोले थे। तब चीन के विमान एलएसी के काफी करीब उड़ान भर रहे थे। यह घटना तब हुई थी, जब दोनों देशों की सेनाओं के जवान सीमा पर आमने-सामने आ गए थे।

ग्लोबल टाइम्स ने युद्धाभ्यास का वीडियो शेयर किया था

चीन का सरकारी मीडिया भी लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ग्लोबल टाइम्स ने रविवार को हजारों सैनिकों के युद्धाभ्यास का वीडियो शेयर किया। इसके जरिए चीन का मीडिया यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सीमा पर चीन किसी भी समय अपने सैनिक और हथियार इकट्ठा कर सकता है।

भारतीय एक्सपर्ट ने कहा कि यह चीन की पुरानी आदत है। वक्त आ गया है कि हमें भी उसके दिमाग से खेलना चाहिए। मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने चीन के उत्तर-पश्चिम में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया है। इसमें हजारों पैराट्रूपर्स और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हैं। 

मई में दोनों सेनाओं के बीच तीन बार झड़प हुई
भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की लंबाई 3488 किलोमीटर की है। इसी पर दोनों देशों में विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। इसके साथ ही कई जगहों पर सीमा विवाद है।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच मई में तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं। वास्तव में यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है।



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