26 मिनट पहले

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  • लॉकडाउन लगा तब शेयर मार्केट धराशायी हो गए, लेकिन सोने की चमक बढ़ती गई
  • माना जा रहा है कि सोना अगले साल 80 हजार रुपए प्रति दस ग्राम तक भी जा सकता है

कोरोनावायरस की वजह से लॉकडाउन क्या लगा, सोने को मानो पंख ही लग गए। लॉकडाउन लगा तब शेयर मार्केट धराशायी हो गए, लेकिन सोने की चमक बढ़ती गई। अब रिपोर्ट्स कह रही हैं कि कोरोनावायरस की वजह से आई आर्थिक मंदी से रिकवरी में वक्त लग सकता है। इसने सोने की बढ़ी हुई कीमतें आगे भी बनी रहने की संभावना जताई है। क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें? क्यों उम्मीद की जा रही है कि सोना अगले साल 80 हजार रुपए प्रति दस ग्राम तक भी जा सकता है?

क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम?

  • भारतीय फिलॉसफी कहती है कि सोने से पैसा नहीं कमा सकते लेकिन बुरे वक्त में आई विपदा को टाल सकते हैं। यानी पूरी दुनिया सोने को एक अच्छा निवेश साधन मानती है।
  • बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। बढ़ते कोविड-19 मामलों को देखते हुए आर्थिक मंदी से रिकवरी कब तक हो जाएगी, कोई नहीं कह सकता। कई ग्लोबल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और कंसल्टिंग फर्म इक्विटी बाजारों में गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं।
  • ऐसे समय में जब स्टॉक मार्केट, बैंकों में एफडी, बॉन्ड जैसे तमाम इन्वेस्टमेंट टूल्स निगेटिव ग्रोथ दिखा रहे हो, तब सेफ हैवन असेट यानी सोने या गोल्ड बॉन्ड्स में निवेश करने की सलाह इन्वेस्टमेंट कंसल्टिंग फर्म दे रही हैं।

किस तरह बढ़ती गई सोने की कीमत?

  • कोरोना की वजह से दुनियाभर के स्टॉक मार्केट धराशायी हो गए। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मई-2019 से ही तेजी दिख रही थी। एक साल में इसने 44 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1250 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 1800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा। भारत में तेजी 50% है। मई-2019 में 32,000 रुपए/दस ग्राम से बढ़कर इस समय 49,000 रुपए/ दस ग्राम तक पहुंच चुका है।

शेयर मार्केट और सोने के बीच अच्छा निवेश साधन क्या है?

  • पिछले 10 वर्षों में, सेंसेक्स (बीएसई-30) और बीएसई-500 ने क्रमशः 9.05% और 8.5% का सालाना रिटर्न दिया है। दिसंबर-2019 तक सेंसेक्स 40,000 अंक तक पहुंच गया था।
  • कोविड-19 के प्रसार के बाद दुनियाभर के स्टॉक मार्केट ध्वस्त हो गए। अप्रैल-2020 में भारतीय बाजार भी ढह गए और 40% तक यानी 27,400 बेस अंक तक गिर गए थे।
  • भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में अप्रैल के बाद रिकवरी दिख रही है। उभरते बाजारों में उभरते ट्रेंड्स पर निवेशकों के पॉजीटिव आउटलुक की वजह से यह तेजी दिख रही है।
  • दूसरी ओर सोने की बात करें तो 2008 में सोना 8,000 रुपए से बढ़कर 25,000 रुपए प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया था। 2019 तक सोने की कीमतें 35 हजार रुपए प्रति दस ग्राम तक पहुंच गई थी, जो अब 50 हजार के पास है। 

क्या है सोने और ब्याज दरों का सीधा संबंध?

  • ब्याज दरों और सोने की कीमतों में निगेटिव संबंध है। यानी ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने की मांग कम होती है और यदि ब्याज दरें कम होती हैं तो सोने की मांग बढ़ती है।
  • दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने मंदी से मुकाबला करने के लिए ब्याज दरें घटाई हैं। बड़े-बड़े आर्थिक पैकेज घोषित किए हैं। असर यह हुआ कि इन्वेस्टर्स ने बैंकों से दूरी बना ली। 2008 की मंदी के दौरान भी ऐसा ही हुआ था।
  • कंसल्टिंग फर्म डेलोइट के आउटलुक के अनुसार बॉन्ड यील्ड, क्रूड की कीमतें और ब्याज दरों में और कमी आ सकती है। बाजारों और बैंकों पर गंभीर परिणाम होंगे और सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए 20 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है। यह लंबी अवधि में फाइनेंशियल मार्केट्स और बांड असेट क्लास को नुकसान पहुंचाएगा। इससे सोने को तेजी मिलेगी।

क्या सोने की कीमतें 80 हजार रुपए तक जा सकती है?

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने मॉनेटरी पॉलिसी रिपोर्ट में कहा कि शेयर बाजारों में तेजी आने पर सोने की कीमतों में गिरावट आएगी। लेकिन इकोनॉमिक पॉलिसी की अनिश्चितता की वजह से सोने की कीमतों में फिलहाल तेजी रह सकती है।
  • इतिहास देखें तो जब इक्विटी और रियल एस्टेट और बॉन्ड्स जैसी रिस्क असेट्स में तेजी आती है तो सोने की कीमतें कम होती हैं। हमने 2008 की मंदी के बाद 2011 से 2015 तक ऐसा होते देखा है।
  • एनालिस्ट कह रहे हैं कि 2021 के दूसरे हाफ तक इन्वेस्टर स्टॉक्स, रियल एस्टेट और अन्य रिस्क असेट्स में निवेश शुरू करेंगे। तब जाकर कहीं, आर्थिक रिकवरी स्पीड पकड़ेगी और सोने की कीमतों में ठहराव आएगा।
  • संभावनाएं हैं कि कोरोनावायरस का टीका 2021 तक सबको मिलने लगेगा। तब तक आर्थिक अनिश्चतताएं जारी रहेंगी। यानी अगले साल तेजी से दौड़ रहा सोना 80 हजार रुपए तक जा सकता है।

क्या मौजूदा कीमतों में सोने में निवेश सुरक्षित रहेगा?

  • भारत में पिछले एक साल में ब्याज दरें तेजी से घटी हैं। इक्विटी मार्केट में आई गिरावट ने भी निवेशकों का फोकस सोने पर ला दिया है।
  • ऐसे में आरबीआई ने ब्याज दरें और घटाई तो स्मॉल सेविंग और टर्म डिपॉजिट रेट्स में और गिरावट आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • एसबीआई इस समय सेविंग्स बैंक डिपॉजिट पर 2.7 प्रतिशत की ब्याज दर दे रही है। वहीं 5-10 वर्ष के टर्म डिपॉजिट पर 5.4 प्रतिशत।
  • ऐसे में सोवरिन गोल्ड बॉन्ड्स में निवेश सबसे अच्छा विकल्प है। इस पर 2.5 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा और कैपिटल गेन भी। यह रुपए में किसी भी गिरावट से निवेशकों को सुरक्षित रखेगा।

क्या इस बात की आशंका है कि सोने की कीमतें क्रैश हो जाएं?

  • इस बात की आशंका से फिलहाल इनकार नहीं किया जा सकता। रिसर्चर और एनालिस्ट कह रहे हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट संभव है। लेकिन यह फिलहाल होता नजर नहीं आ रहा।
  • वैसे, यदि केंद्रीय बैंक आर्थिक संकट से निपटने के लिए सोना बेचते हैं या रिस्क असेट्स में नुकसान बढ़ने पर निवेशक ईटीएफ की बिकवाली करते हैं तो सोने पर दबाव बन सकता है और कीमतें गिर सकती हैं।

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