• मोदी शुक्रवार को अचानक लद्दाख पहुंचे, 9 घंटे के इस दौरे पर उन्होंने जवानों से मुलाकात की और 26 मिनट स्पीच भी दी
  • मोदी ने कहा- विस्तारवादी ताकतें दुनिया से मिट गईं, इस पर चीन ने कहा- यह बढ़ा-चढ़ाकर दिया गया बयान है

दैनिक भास्कर

Jul 03, 2020, 11:32 PM IST

नई दिल्ली. गलवान झड़प के 18 दिन बाद शुक्रवार को नरेंद्र मोदी अचानक लद्दाख पहुंचे। मकसद जवानों का हौसला बढ़ाना और चीन को यह स्पष्ट संदेश देना था कि उसकी हरकतों को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। 9 घंटे के इस दौरे पर मोदी ने कहीं भी सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया। लेकिन, उनके इस दौरे पर चीन की प्रतिक्रियाओं ने यही जाहिर किया कि चोर की दाढ़ी में तिनका है। 

मोदी के दौरे से घबराया चीन ने एक दिन में दो बयान जारी किए। पहली बार दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की दुहाई दी और दूसरी बार विस्तारवादी होने का मोदी का तंज खुद ही अपने ऊपर ओढ़ लिया।

पहला बयान मोदी के लद्दाख पहुंचने के साढ़े चार घंटे बाद दिया
मोदी सुबह करीब साढ़े नौ बजे लद्दाख पहुंचे थे। यहां उन्होंने जवानों से मुलाकात की और 26 मिनट की स्पीच दी। मोदी ने इस स्पीच में बिना चीन का नाम लिए बगैर कहा कि भारत हर आक्रमण के बाद और मजबूत होकर उभरा है। कमजोर शांति की पहल नहीं कर सकता। वीरता ही शांति की शर्त होगी।

इस बयान के बाद दोपहर करीब 2 बजे चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने कहा- भारत और चीन के बीच बातचीत जारी है। हम मिलिट्री और डिप्लोमैटिक चैनल के जरिए भी हालात को सामान्य बनाने और तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। किसी भी पक्ष को ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए जो इस मौके पर हालात को बिगाड़े।

दूसरा बयान अस्पताल में जवानों से मुलाकात के एक घंटे बाद

मोदी ने अपने लद्दाख दौरे पर लेह के आर्मी अस्पताल में गलवान घाटी में हुई झड़प में घायल हुए जवानों से भी मुलाकात की। यह तस्वीरें और वीडियो करीब साढ़े पांच बजे सामने आए। मोदी ने यहां कहा कि आपने सबने मिलकर करारा जवाब दिया है। दुनिया जानना चाहती है कि ये वीर कौन हैं, उनकी ट्रेनिंग कैसी है? पूरी दुनिया आपकी वीरता का एनालिसिस कर रही है।

इससे पहले मोदी ने अपनी स्पीच में चीन का नाम लिए बगैर कहा था कि विस्तारवाद ने ही मानव जाति का विनाश किया, इतिहास बताता है कि ऐसी ताकतें मिट गईं।

हालांकि, इस बयान पर चीन की प्रतिक्रिया मोदी की अस्पताल में जवानों से मुलाकात के एक घंटे बाद आई। चीन ने कहा कि हमने अपने 14 में से 12 पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए सीमांकन तय किया। हमने सीमाई इलाकों को दोस्ताना सहयोग की जमीन में तब्दील किया। चीन को विस्तारवादी नजरिए से देखना बेबुनियाद है। यह बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है और पड़ोसियों के साथ विवादों को जन्म दिया जा रहा है।

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