धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया. पहले आर्थिक सर्वेक्षण में रोडमैप और फिर केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक साथ कई घोषणाएं की गईं। इसके बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग और इनके बढ़ने की चर्चा मुद्दा बन गई है। भारत में देखें तो वर्ष 2017-18 की तुलना में 2018-19 में दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दो गुना से अधिक हुई तो चार पहिया वाहनों की बिक्री तीन गुना बढ़ी। लेकिन देश में बिक्री होने वाले कुल दो पहिया और चार पहिया वाहनों में इनकी हिस्सेदारी महज आधा फीसदी से भी कम है। देश में वर्ष 2018-19 में सात लाख 59 हजार छह सौ दाे, तीन और चार पहिया वाहनों की बिक्री हुई है।

 

नीति आयोग की योजना के मुताबिक देश में 2025 तक 150 सीसी से कम क्षमता वाले सभी दो पहिया वाहन देश में इलेक्ट्रिक बिकेंगे। इसके साथ ही तीन पहिया, बस और कारों की श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाना है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की राह में कुछ बाधाएं है। भारत में बैटरी उत्पादन न होना, अच्छी बैटरी का न होना और बुनियादी सहूलियतों के अभाव में यह लोकप्रिय नहीं हो पा रही है। सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (एसएमईवी) के अनुसार देश में वर्तमान में करीब 68 कंपनियां दो पहिया, तीन पहिया और कार निर्माण संबंधी कार्य कर रही हैं। रिसर्च फर्म क्रिसिल के निदेशक रिसर्च हेतल गांधी ने कहा कि बजट में जीएसटी दर घटाने, ब्याज की टैक्स में छूट आदि घोषणाओं से दो पहिया वाहन खरीदने वालों को परंपरागत दो पहिया वाहनों की तुलना में 10 फीसदी तक बचत होगी। वहीं तीन पहिया टैक्सी वालों को पांच फीसदी तक फायदा सामान्य टैक्सियों की तुलना में होगा।



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