दैनिक भास्कर

Oct 19, 2019, 12:24 PM IST

क्षितिज राज, ग्रेटर नोएडा. दिवाली पर सेकंड हैंड कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो ‘क्लॉक्ड कारों’ से बचकर रहिए…

 

क्या है कार क्लॉकिंग : कार के ओडोमीटर में छेड़छाड़ करना ‘क्लॉकिंग’ है जो माइलेज को पीछे खिसकाने के लिए की जाती है। यह गैरकानूनी है, खतरनाक है। माइलेज का कार की कीमत से सीधा संबंध होता है।

 

सर्विस हिस्ट्री चेक कर लें : कार बेचने वाले अक्सर यह जहमत नहीं उठाते कि सर्विस बुक में बदलाव करें। यह बदलाव यदि होगा तो भी दिख जाएगा। सबसे बेहतर तरीका है, कंपनी के सर्विस सेंटर के पास जाना। जिस कंपनी की कार है, उसके सर्विस सेंटर से इसकी तमाम सर्विस की जानकारी ली जा सकती है। इनमें माइलेज का उल्लेख तो रहता ही है, यह भी जानकारी हो सकती है कि कार में कोई बड़ा काम या डेंटिंग-पेंटिंग तो नहीं हुई है।

 

कार की हालत पर भी गौर करें : ज्यादा चली हुई कारों को आसानी से पहचाना जा सकता है। बाहरी जांच के दौरान गौर करें कि कलर शेड बदला तो नहीं है, अक्सर डेंटिंग-पेंटिंग से रंग अलग हो जाता है। आप ड्राइवर सीट पर बैठकर भी स्थिति को भांप सकते हैं। सीट बेल्ट का कसाव, स्टियरिंग पर स्क्रैच, स्विच का उड़ा रंग बताता है कि कार खूब दौड़ चुकी है।

 

एक बार चलाकर जरूर देखें : क्लॉक्ड कार चलाएंगे तो इसके थके हुए सस्पेंशन, ढीले ब्रेक, ढीला गिअरबॉक्स महसूस हो जाएगा। इस टेस्ट ड्राइव के दौरान इंजन की आवाज भी सुनें। ऐसी कारों की बॉडी भी ज्यादा आवाज करती है।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here