लेनोवो ग्रुप के पास पहले ही दो जाने-पहचाने ब्रांड लेनोवो और मोटोरोला हैं। दुनिया भर में कंपनी अपने मजबूत और विभिन्न शानदार प्रोडक्ट के दम पर बड़ी संख्या में बिक्री करती है। हालांकि, दूसरी कंपनियों की तरह कंपनी ने सिर्फ ऑनलाइन प्रोडक्ट के लिए अपना नया ब्रांड ज़ूक लॉन्च किया था।

आज हम, लेनेवो ज़ूक ज़ेड1 का रिव्यू करेंगे। हालांकि, ग्लोबली इस फोन को ज़ूक ज़ेड1 के तौर पर पेश किया गया है लेकिन लेनोवो ने अपने पेरेंट नाम को बनाए रखने के इरादे से भारत में इसे लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 नाम से लॉन्च किया। गौर करने वाली बात है, कि ज़ूक ज़ेड1 को पहली बार पिछले साल सितंबर में चीन में लॉन्च किया गा था। इसलिए आज इस फोन का रिव्यू करना थोड़ा आउटडेटेड ही है। आज हम अपनी पड़ताल में जानेंगे लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 की खूबियां और कमियां।
 

लुक और डिजाइन
कुछ साल पहले की ही बात है, जब 5.5 इंच स्क्रीन वाले किसी फोन को ओवरसाइज़ माना जाता था। इसके साथ ही आपके हाथ में एक बड़ा फोन दिखने पर चर्चा शुरू हो जाती थी। लेकिन आज, स्मार्टफोन में ज्यादा मीडिया खपत के चलते साइज़ एक जरूरी शर्त है। लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 इसी साइज़ के साथ आता है हालांकि यह निश्चित तौर पर थोड़ा भारी महसूस होता है।

इस स्मार्टफोन के भारी होने की दो मुख्य वजह हैं मेटल फ्रेम और 4100 एमएएच की बैटरी, जिससे फोन का वजन 175 ग्राम हो जाता है। हालांकि, फोन में यूनिबॉडी केस नहीं है और रियर पैनल प्लास्टिक का है। बैटरी को यूजर एक्सेस नहीं कर सकते हैं। फ्रेम के साथ ही बायीं तरफ डुअल सिम ट्रे है। फोन एक्सपेंडेबल स्टोरेज को सपोर्ट नहीं करता इसलिए माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट नहीं दिया गया है।
 

भारत में लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 व्हाइट और स्पेस ग्रे कलर वेरिएंट में उपलब्ध है। हमारी रिव्यू यूनिट ग्रे थी जो हमें व्हाइट से थो़ड़ा ज्यादा बेहतर लगा। फोन का रियर डल, मैटेलिक फिनिश का है। फोन में किसी तरह की लेनोवो ब्रांडिंग नहीं है लेकिन रियर पर नीचे की तरफ सिर्फ ज़ूक का लोगो है। रियर पर ऊपर की तरफ बीचोंबीच कैमरा और फ्लैश दिया गया है। कुल मिलाकर हमें फोन का लुक, डिजाइन और स्टायल खासा अच्छा लगा।

लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 में नीचे की तरफ एक माइक्रोफोन, स्पीकर और चार्जिंग व डेटा ट्रांसफर के लिए यूएसबी टाइप-सी पोर्ट है। यूजर को फोन के साथ बॉक्स में एक 13 वाट का पॉवर एडेप्टर और एक यूएसबी 3.0 केबल (एक तरफ टाइप-ए प्लग और दूसरी तरफ टाइप-सी) के साथ मिलेगा। फोन में दायीं तरफ पॉवर व वॉल्यूम बटन जबकि ऊपर की तरफ 3.5 एमएम हेडफोन शॉकेट है। फोन के अगले हिस्से में तकरीबन 70 प्रतिशत हिस्से पर स्क्रीन का कब्जा है जबकि इसके ऊपर कैमरा, ईयरपीस और प्रॉक्सिमिटी सेंसर है। नीचे की तरफ फिजिकल होम बटन है जिसमें फिगंरप्रिंट सेंसर इंटीग्रेटेड है। डिस्प्ले के नीचे ही कैपेसिटिव एंड्रॉयड नेविगेशन बटन है।  
 

हमने ऐसे कई स्मार्टफोन देखे हैं जिनमें होम बटन में ही फिंगरप्रिंट सेंसर बिल्टइन आता है। सैमसंग गैलेक्सी ए8  और एचटीसी वन ए9 (रिव्यू) सहित कई फोन में सिर्फ टच करने से ही (स्टैंडबाय मोड में भी) ही फोन अनलॉक हो जाता है लेकिन ज़ूक ज़ेड1 में ऐसा नहीं होता। इस फोन को होम बटन को दबाकर एक्टिव करना पड़ता है और जब तक फिगंरप्रिट की पहचान नहीं होती तबतक बटन दबाए रखना पड़ता है।

सिर्फ यही अपनेआप में एक समस्या नहीं है बल्कि बटन को दबाने के लिए थोड़ी ज्यादा कोशिश करनी पड़ती है। फोन को अनलॉक करने के लिए सेंसर काफी जल्दी और ठीक से काम करता है। लेकिन दूसरे डिवाइस की तरह यह प्रक्रिया उतनी आसान नहीं है। पहले सेंसर एक कैपेसिटिव बैक बटन की तरह भी काम करता था लेकिन अब एक सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे डिसेबल कर दिया गया है।

लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 में 1080×1920 पिक्सल रिजॉल्यूशन का स्क्रीन दिया गया है जिसकी डेनसिटी 401 पीपीआई है। स्क्रीन शानदार है और लगभग सभी जरूरतों को पूरा करती है। फोन में दिए गए आईपीएस-एलसीडी स्क्रीन उतनी चमकदार नहीं है जितनी कि हमें उम्मीद थी और सबसे ज्यादा ब्राइट लेवल होने पर भी यह उतनी चमक नहीं देती जितना देना चाहिेए। हालांकि, स्क्रीन पर दी गई पोलराइज कोटिंग सूरज की रोशनी में फोन को आसानी से इस्तेमाल करने में मदद करती है इसलिए फोन में बहुत ज्यादा ब्राइटनेस की जरूरत भी नहीं पड़ती।
 

इसके अलावा, फोन में एक लाइवडिस्प्ले भी है, इस सेटिंग की मदद से दिन में समय के अनुसार स्क्रीन के कलर टोन को ऑप्टिमाइज किया जा सकता है।

स्पेसिफिकेशन
आज जब 15,000 रुपये के अंदर कीमत वाले स्मार्टफोन लेटेस्ट मीडियाटेक हीलियो या स्नैपड्रैगन 600 सीरीज प्रोसेसर पर चलते हैं, वहीं लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 में प्रीमियम लेकिन पुराना2.5 गीगाहर्ट्ज़ पर चलने वाला 32-बिट क्वाड-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 801 प्रोसेसर दिया गया है। करीब दो साल पहले बाजार में पहली बार स्नैपड्रैगन 801 स्मार्टफोन पेश हुए थे, इसलिए लेनोवो के प्रोसेसर का चुनाव करना सवालों के घेरे में है। खासतौर पर 32-बिट का प्रोसेसर जबकि प्रैक्टिकली अब सभी हार्डवेयर 63-बिट प्रोसेसर पर आ चुके हैं।
 

ज़ूक ज़ेड1 में 3 जीबी रैम है और फोन दोनों सिम पर 4जी कनेक्टिविटी (भारतीय बैंड सपोर्ट के साथ), वाई-फाई एसी कनेक्टिविटी सपोर्ट करता है। स्मार्टफोन को दमदार बनाने के लिए 4100 एमएएच की बैटरी दी गई है। फोन में 64 जीबी की इनबिल्ट स्टोरेज दी गई है लेकिन फोन एक्सपेंडेबल स्टोरेज सपोर्ट नहीं करता इसलिए आपको एक सीमित स्टोरेज के साथ ही काम चलाना पड़ता है।

सॉफ्टवेयर
लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 स्मार्टफोन सायनोजेन ओएस 12.1 पर चलता है जो एंड्रॉयड 5.1.1 पर आधारित है। हालांकि, फोन को एंड्रॉयड 6.0 पर आधारित सायनोजेन ओएस 13 पर अपग्रेड करने की बात कही जा रही है लेकिन फिलहात फोन के ओटीए सॉफ्टवेयर अपडेट सिस्टम में यह अपडेट मौजूद नहीं है। सायनोजेन ओएस फोन को अपनी सुविधानुसार कस्टमाइज करने का विकल्प जरूर देता है।

कई तरह से सायनोजेन ओएस स्टॉक एंड्रॉयड की तरह ही काम करता है और आप स्टॉक एंड्रॉयड की तरह ही दिखने वाली थीम भी बदल सकते हैं। सिस्टम की पहचान है इसका हर तरह से कस्टमाइज होना और लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 में हमने इसे देखा भी। होम स्क्रीन और ऐप ड्रॉयर को अलग-अलग लेआउट में बदला जा सकता है। इसके अलावा ग्रिड साइज़, स्क्रॉल इफेक्ट और आइकन लेबल भी बदले और टॉगल किए जा सकते हैं। फोन में करने के लिए और भी बहुत कुछ है। इसके अलावा आप काफी हद तक बेसिक लेवल पर यूजर इंटरफेस को भी कंट्रोल कर सकते हैं।
 

इसके अलावा सेटिंग ऐप में जाने पर कई अलग-अलग विकल्प मिलते हैं जिससे आप डिवाइस को और ज्यादा बेहतर तरीके से कंट्रोल कर सकते हैं। फोन को चार्ज करने पर लाइट का ऑन या ऑफ होना, बैटरी अलर्ट के लिए नोटिफिकेशन लाइट का कलर, होम व रीसेंट बटन के लिए कस्टम एक्शन, स्टेटस बार और नोटिफिकेशन ड्रॉयर के लिए अलग-अलग एलिेमेंट जैसे कई विकल्प भी मिलते हैं। सायनोजेन ओएस उन एडवांस्ड यूजर के लिए बेहतरीन सिस्टम है जो अपने फोन पर ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं। हमें यह फोन इस्तेमाल करने में अच्छा लगा।
 

कैमरा
लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 में 13 मेगापिक्सल रियर कैमरा दिया गया है जो सोनी के आईएमएक्स 214 सेंसर पर चलता है। कैमरे में ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइज़ेशन व डुअल-एलईडी फ्लैश दिया गया है। फोन में 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। दोनों कैमरों से 1080 पिक्सल तक की वीडियो रिकॉर्ड की जा सकती है। इसके अलावा रियर कैमरे से 60एफपीएस वीडियो रिकॉर्डिंग भी होती है।

कैमरा ऐप सायनोजेन का अपना कैमरा नेक्स्ट है, जो इस्तेमाल करने और काम करने में काफी अच्छे विकल्प के साथ आता है। ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले टॉगल को व्यूफाइंडर स्क्रीन से ही आसानी से एक्सेस किया जा सकता है जिनमें फ्लैश, कैमरा व टाइमर सेटिंग शामिल हैं. सिर्प एक टच के साथ ही वीडिो रिकॉर्ड की जा सकती है। पैनोरमा मोड भी आसानी से टॉगल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सेटिंग मेन्यू में जाकर रिजॉल्यूशन सेटिंग, मैनुअल कंट्रोल और कोडेक सिलेक्शन किया जा सकता है। इन विकल्प से तस्वीरों व वीडियों को ज्यादा बेहतर बनाने का विकल्प भी मिलता है।
 

फोन का कैमरा खासा अच्छा है और इससे तस्वीरें शार्प और डिटेल के साथ आती हैं। तस्वीरों में कलर टोन भी सही आती है। अच्छी रोशनी में तस्वीरें अच्छी हैं जबकि कम रोशनी में भी हम थोड़े नॉइस व बिखराव के साथ अच्छी तस्वीरें लेने में कामयाब रहे। प्राकृतिक रोशनी की तुलना में इंडोर में तस्वीरें उतनी अच्छी नहीं आती हैं लेकिन डिटेल व कलर के हिसाब से इन्हें ठीकठाक कहा जा सकता है।

अच्छी रोशनी में वीडियो काफी बेहतर क्वालिटी की बनती है लेकिन कम रोशनी में क्वालिटी खराब हो जाती है।
 

परफॉर्मेंस
दो साल पुाने प्रोसेसर के बावजूद, लेनोवो ज़ूकक ज़ेड1 की परफॉर्मेंस काफी अच्छी है। हालांकि, आपको नए क्वालकॉम 650 और 652 प्रोसेसर में ज्यादा बेहतर परफॉर्मेंस मिलेगी जो इसी दाम वाले दूसरे डिवाइस में मिल रहा है। इसके अलावा यह भी याद रखने वाली बात है कि एड्रेनो 330 जीपीयू भी काफी पुराना है और यह ओपनजीएल ईएस 3.1 और 3.2 सपोर्ट नहीं करता जिससे फोन में कुछ नए ग्रफिक्स इंटेंसिव गेम्स नहीं खेले जा सकते।

फोन की सामान्य परफॉर्मेंस बेहद शानदार रही। इसके साथ ही हमें फोन में कोई हीटिंग, शटर परेशानी देखने को भी नहीं मिली। इसका श्रेय निश्चित तौर पर सायनोजेन ओएस को जाता है जो यह तय करता है कि ज़ूक ज़ेड1 आसानी से बिना किसी परेशानी के चले।
 

हमें फोन के बेंचमार्किंग टेस्ट में शानदार आंकड़े मिले खासतौर पर ग्राफिक्स बेंचमार्क में।

ज़ूक ज़ेड1 के वीडियो लूप टेस्ट में इसकी बैटरी ने 13 घंटे 40 मनट तक हमारा साथ दिया जो फोन की एक बड़ी खासियत है। वहीं आम इस्तेमाल के दौरान एक बार चार्ज करने पर हम ज़ूक ज़ेड1 को करीब एक दिन से ज्यादा चला सके। वाई-पाई, सेल्युलर कनेक्टिविटी और कॉल क्वालिटी भी बेहद अच्छी है। लेकिन फोन का स्पीकर (जो बेहद खराब साउंड देता है) निराश करता है। हालांकि, हेडफोन से म्यूजिक प्लेयर और वीडियो देखने के लिए ठीकठाक साउंड मिलता है।
 

हमारा फैसला
लेनोवो ने ज़ूक ज़ेड1 के तौर पर एक शानदार डिवाइस पेश किया है। फोन का डिजाइन, बनावट शानदार है, सॉफ्टेवयर अच्छे से काम करता है, डिस्प्ले बढ़िया है और स्टोरेज भी बरपूर है। कनेक्टिविटी और बैटरी लाइफ भी शानदार है। इसेक अलावा स्क्रीन भी शार्प है और फोन को अपने हिसाब से कस्टमाइज़ किया जा सकता है। इस सबसे बढ़कर, कंपनी ने फोन की कीमत ऐसी रखी है जिससे ग्राहकर इस फोन की तरफ निश्चित तौर पर आकर्षित होंगे। खासतौर पर वो एडवांस्ड यूजर जो सायनोजेन ओएस के बारे में थोड़ा बहुत भी जानते हैं।

लेकिन, फोन में कुछ ध्यान खींचने वाली कमियां भी हैं। हालांकि हमें फोन के इस्तेमाल के समय इसकी परफॉर्मेंस में कोई कमी देखने को नहीं मिली। फोन पुराने 32-बिट प्रोसेसर और जीपीयू पर चलता है जिससे कुछ नए गेम और ऐप में समस्या हो सकती है। इसके अलावा सायनोजेन ओएस और एंड्रॉयड का पुराना वर्जन है और नए सॉफ्टवेयर अपडेट के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली है। इस सबसे अलग, ज़ेड1 को खरीदना भी आसान नहीं होगा क्योंकि यह फोन फ्लैश सेल के जरिए बेचा जाएगा।  

लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 की कीमत को देखते हुए यह एक शानदार विकल्प है जो बेहतरीन फीचर के साथ आता है। अगर आपके लिए हार्डवेयर का पुराना होना मसला नहीं है तो आप इसे एक सेकेंडरी फोन के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो निश्चित तौर पर ज़ूक ज़ेड1 इस कीमत में आने वाले दूसरे स्मार्टफोन से कहीं बेहतर है।
 



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