ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम कीमत में प्रोडक्ट लॉन्च करना पिछले दो से ज्यादा सालों से भारत में एंड्रॉयड फोन निर्माताओं के लिए एक चलन बन गया है। दो साल पहले तक 5,000 रुपये से कम कीमत में स्मार्टफोन के बारे में सोचना भी नामुमकिन होता था लेकिन आज बाजार में इस प्राइस सेगमेंट में स्मार्टफोन लॉन्च करने की होड़ मची हुई है।  

कीमत जितनी कम होगी, पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों की संभावना उतनी ज्यादा होगी। माइक्रोमैक्स इसी इरादे से छोटे शहरों-गांवो और अंग्रेजी ना बोलने वाले ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर मोबाइल पेश कर रही है जिन्होंने शायद अब तक सिर्फ वॉयस और एसएमएस सर्विस ही इस्तेमाल की है।

नए कैनवस स्पार्क 3 की कीमत कंपनी ने 4,999 रुपये रखी है। यह कीमत उन खरीददारों के लिए अच्छी कही जा सकती है जिन्होंने पहले कभी कम्प्यूटिंग डिवाइस का इस्तेमाल नहीं किया हो। आज हम माइक्रोमैक्स के इस नए स्मार्टफोन का रिव्यू करेंगे और देखेंगे कि क्या वाकई कैनवस स्पार्क 3 खरीदने योग्य है?

लुक और डिजाइन
5,000 रुपये की कीमत वाला कैनवस स्पार्क 3 देखने में अच्छा है। दूसरे कम कीमत वाले डिवाइस की तरह यह फोन सस्ता या बनावटी नहीं लगता। फोन का अगला हिस्सा प्लेन है और कैमरा व  ईयरपीस ऊपर की तरफ है. नेविगेशन बटन ऑनस्क्रीन हैं। स्क्रीन के बायें और दायें तरफ बहुत कम स्पेस है जिससे फोन एक हाथ से इस्तेमाल करने में बेहद आसान बन जाता है।
 

फोन हाथ में लेने पर बिल्कुल भी भारी नहीं लगता और इसके कर्व इसे सुविधानुसार पकड़ने और इस्तेमाल करने मेंमदद करते हैं। किनारे पर एक मैटेलिक बैंड है। दायीं तरफ पॉवर और वॉल्यूम बटन हैं व नीचे की तरफ एक माइक्रो-यूएसबी पोर्ट दिया गया है।

मैट टेक्सचर के साथ प्लास्टिक का बना रियर पैनल रिमूवेबल है और यह अच्छी ग्रिप देता है। रियर पैनल पर ऊपर की तरफ कैमरा और फ्लैश है जिसके नीचे माइक्रोमैक्स का लोगो है। नीचे की तरफ एक बड़ी सी स्पीकर ग्रिल है। रियर कवर के नीचे दो माइक्रो-सिम स्लॉट और एक माइक्रोएसडी स्लॉट है। सिम कार्ड को बदलने के लिए आपको बैटरी को बाहर निकालना होगा।
 

कैनवस स्पार्क 3 खरीदने पर आपको एक चार्जर, यूएसबी केबल, हेडसेट, स्क्रीन प्रोटेक्टर और फिंगरप्रिंट, धूल साफ करने  के लिए एक छोटा सा माइक्रोफाइबर कपड़ा साथ मिलेगा। कीमत को देखते हुए एक्सेसरी के इस पैकेज को अच्छा कहा जा सकता है।  

स्पेसिफिकेशन
कैनवस स्पार्क 3 में स्प्रेडट्रम प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। फोन में 1.3 गीगाहर्ट्ज़ पर चलने वाला क्वाड-कोर प्रोसेसर है। ग्राफिक्स के लिए माली-400एमपी2 जीपीयू दिया गया है। फोन में एक साथ दो माइक्रो-सिम चलाए जा सकते हैं लेकिन यह 4जी को सपोर्ट नहीं करता जिससे यह फोन आज के बाजार के हिसाब से थोड़ा पुराना मालूम पड़ता है।
 

फोन में 1 जीबी रैम और 8 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज है। हालांकि, यूजर के इस्तेमाल के लिए 4.76 जीबी स्पेस ही मिलेगा जबकि बाकी का स्पेस डिवाइस की फाइल द्वारा पहले ही कब्जा लिया गया है। पिछले काफी समय के बाद कोई ऐसा फोन हमें ऐसा मिला जिसमें हमें सभी बेंचमार्किंग ऐप और फाइल में कम स्पेस देखने को मिला। स्टोरेज के लिए आपको निश्चित तौर पर एक मेमोरी कार्ड की जरूरत पड़ेगी ही और एक्सपेंडेबल स्टोरेज का भी सिर्फ 32 जीबी होना निराशाजनक है।

फोन में 720×1280 पिक्सल रिजॉल्यूशन वाला 5.5 इंच स्क्रीन है जो इसके सबसे खास फीचर में से एक है। फोन का रियर कैमरा 8 मेगापिक्सल जबकि फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल है। हालांकि, फोन के रियर कैमरे से 720 पिक्सल वीडियो रिकॉर्डिंग जबकि फ्रंट कैमरे से 480 पिक्सल वीडियो रिकॉर्डिंग ही की जा सकती है।
 

कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई बी/जी/एन और ब्लूटूथ 4.0 जैसे फीचर हैं। फोन में एम्बियेंट लाइट सेंसर की कमी है इसलिए हमेशा ब्राइटनेस को मैनुअली एडजस्ट करना होता हैष फोन में दी गई रिमूवेबल बैटरी की क्षमता 2500 एमएएच है।

सॉफ्टवेयर
माइक्रोमैक्स द्वारा सॉफ्टेवेयर का चुनाव थोड़ा अजीब लगता है। कंपनी ने फर्स्ट टाइम एंड्रॉयड यूजर को ध्यान में रखते हुए बेहद साधारण मल्टी-लैंग्वेज (बहुभाषी) इंडस लॉन्चर दिया है लेकिन दूसरी तरफ कई जटिल ऐप और फीचर हैं जो एक नॉन-टेक-सेवी यूजर को काफी परेशान कर सकते हैं।
 

फोन एंड्रॉयड 5.1 लॉलीपॉप पर चलता है औरजब आप बूट करते हैं तो कस्टम इंडस होम स्क्रीन पर बेसिक फंक्शन के लिए सात बड़े आइकन दिखते हैं। बायीं तरफ एक दूसरी होम स्क्रीन है। हर बार किसी ऐप से बाहर निकलने पर आप होम स्क्रीन पर आजाएंगे जिससे आपको अपने पेज पर वापस जाने के लिेए कई बार वापस जाना पड़ेगा और यह पूरी प्रक्रिया काफी धीमी है।
 

फोन में होम स्क्रीन विजट एक साथ अलग हुए लगते हैं। फोन में ऐप ड्रॉयर पेज पर 4 बड़े साइज़ वाले आइकन के साथ आईओएस जैसा डॉक है लेकिन ना तो ये और ना ही होम स्क्रीन को कस्टमाइज किया जा सकता है।

इंडस लॉन्चर सेटिंग में जाकर आसानी से भाषा और दूसरी बेसिक सेटिंग बदली जा सकती हैं लेकिन मुख्य एंड्रॉयड सेटिंग आइकन छिपा हुआ है। गूगल सेटिंग आइकन भी दूसरे ऐप के साथ दिखता है जो खासा कन्फ्यूजिंग है। राहत की बात है कि इंडस सेटिंग में स्टॉक एओएसपी लॉन्चर पर स्विच करने का विकल्प है।
 

करीब दो साल पहले लॉन्च हुए माइक्रोमैक्स यूनाइट 2 की तरह ही माइक्रोमैक्स कैनवस स्पार्क 3 में स्थानीय भाषा सपोर्ट दिया गया है। हालांकि कैनवस स्पार्क 3 स्मार्टफोन 21 की जगह सिर्फ 10 भाषा ही सपोर्ट करता है। आप दो प्राइमरी भाषा का चुनाव कर सकते हैं और उनके बीच फटाफट टॉगल भी कर सकते हैं।
 

माइक्रोमैक्स ने पहले से कई सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल किये हैं जिनमें से कई का इस्तेमाल बेहद कम ही है। फोन में एक इंडस ऐप स्टोर और दूसरा ऐप सेंटर है। माइक्रोमैक्स का एम गेम्स और एम लाइन स्टोरफ्रंट है। इसके अलावा कई कॉमन ऐप और गेम जैसे अमेज़न शॉपिंग, ओएलएक्स, स्नैपडील, हाइक, क्विकर, स्कैंडिड, ओपेरा मिनी, गाना, क्लीन मास्टर, सीएम सिक्योरिटी, सीएम लॉकर और एम ट्रैवल मौजूद हैं। अच्छी बात है कि थर्ड-पार्ट ऐप को स्पेस खाली करने के लिए रिमूव किया जा सकता है।

परफॉर्मेंस
फोन में कई कमियां हैं। एक ऐप से बाहर निकलने से लेकर होम स्क्रीन तक आने में भी कुछ सेकेंड लग जाते हैं। बेसिक टास्क जैसे फोटो गैलरी से स्वाइप करने के दौरान भी कई ऐप दिक्कत खड़ी करते हैं। ऐसा सीएम सिक्योरिटी ऐप की वजह से भी हो सकता है जो हर वर्त बैकग्राउंड में चलत रहता है। प्री-इंस्टॉल ऐप स्नैपडील को खोलने के दौरान हमें एक चेतावनी का संदेश मिला जो इसके द्वारा प्राइवेसी लीक और आर्थिक नुकसान की बात कहता है।
 

फोन का डिस्प्ले भी काफी लो-क्वालिटी का है। वीडियो में डार्क सीन नकली लगते हैं और व्यूइंग ऐंगल काफी खराब है। साउंड क्वालिटी ठीकठाक है और गेम और वीडियो वॉयस के लिए यह ठीक कही जा सकती है लेकिन म्यूजिक के लिए नहीं।

बेंचमार्क टेस्ट के दौरान कैनवस स्पार्क 3 के हार्डवेयर से ठीकठाक आंकड़े ही मिले।
 

फोन की बैटरी लाइफ अच्छी कही जा सकती है और हमारे वीडियो लूप टेस्ट में बैटरी ने 7 घंटे और 13 मिनट तक साथ दिया। फोन का स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी खपत करता है और सामान्य इस्तेमाल के दौरान फोन की बैटरी पूरे दिन तक चलती है।

फोन के कैमरा से हमें हमारी उम्मीद से बेहतक परिणाम मिले। फोकस में थोड़ा समय लगता है और शटर में भी समस्या आती है इसलिए अचानक लिए जाने वाले शॉट के बारे में तो भूल ही जाइये। वहीं दूसरी तरफ दिन की रोशनी में कैमरे से अच्छे परिणाम मिलते हैं। फोन के कैमरे से ली गई तस्वीरों में कलर ठीक आते हैं और तस्वीरें बहुत ज्यादा आर्टिफिशियल नहीं लगतीं। फोन से रिकॉर्ड की जाने वाली वीडियो क्वालिटी उम्मीद के मुताबिक ही थोड़ी खराब थी।

हमारा फैसला
हमें इस बात को ध्यान रखना चाहिए कि कैनवस स्पार्क 3 का संभावित बाजार उन लोगों का है जिन्होंने ना पहले कभी स्मार्टफोन बल्कि कम्प्यूटर का भी इस्तेमाल नहीं किया है। यह बात भी याद रखनी चाहिए कि आज स्मार्टफोन मार्केट में इस तरह के डिवाइस 5,000 रुपये से कम दाम में मौजूद हैं। वास्तविकता है कि इस फोन में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो ये फोन नहीं कर सकता। फोन की परफॉर्मेंस भी काफी कमजोर है।
 

फोन का सॉफ्टवेयर पहली बार स्मार्टफोन यूज करने वाले उन यूजर की मदद नहीं कर सकता जिनको अंग्रेजी के साथ मुश्किल आती है। माइक्रोमैक्स कैनवस स्पार्क 3 को इस कीमत में थोड़ा और बेहतर बनाया जा सकता था।

जो यूजर पहले से किसी एंड्रॉयड फोन को इस्तेमाल करने के आदी हैं, उन्हें कम कीमत वाला माइक्रोमैक्स कैनवस स्पार्क 3 ठीकठाक ही लगेगा। फोन में सभी बेसिक फीचर दिये गए हैं और कैमरा भी ठीक है।



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