कूलपैड ने करीब एक साल पहले डैज़ेन के साथ साझेदारी कर भारत में एंट्री की थी। लेकिन यह साझेदारी एक महीने बाद ही टूट गई। इसके बाद दोनों चीनी कंपनियों के रास्ते अलग-अलग हो गए। आज जिस कंपनी को हम कूलपैड के नाम से जानते हैं उसने सिर्फ 10,000 रुपये कम सेगमेंट वाले बाजार पर ध्यान दिया है। कूलपैड नोट 3  और इसके दो वेरिएंट बाजार में पेश हो चुके हैँ। 24,999 रुपये की ऊंची कीमत पर लॉन्च हुआ कूलपैड मैक्स कंपनी का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कहा जा सकता है और प्रीमियम फोन पेश करने की कड़ी में ये एक कदम भी है।

नोट 3 के सभी वेरिएंट की तरह ही है कूलपैड मैक्स की पूरी कोशिश एक प्रीमियम स्मार्टफोन साबित होने की है। मेटल बॉडी, कर्व्ड-ऐज ग्लास, शानदार स्पेसिफिकेशन और एक्सेसरी के साथ खूबसूरत बॉक्स में आने वाले कूलपैड मैक्स स्मार्टफोन की क्या हैं खूबियां? आज हम करेंगे कूलपैड के इस नए स्मार्टफोन का रिव्यू।

लुक और डिजाइन
कूलपैड मैक्स सुनहरे अक्षरों से प्रिंटेड एक खूबसूरत बॉक्स में आता है। बॉक्स को स्लाइड कर पर आप इस फोन को इसकी ट्रे से निकाल सकते हैं। इसके नीचे आपको काले रंग के कई बॉक्स में एक्सेसरी मिलेंगी। फोन के साथ आपको एक क्विक-चार्ज सपोर्ट वाला चार्जर, एक फ्लैट यूएसबी केबल, एक वायर्ड हेडसेट, एक प्लास्टिक केस, एक स्क्रीन प्रोटेक्टर और एक सिम इजेक्टर पिन मिलेगा। फोन को बॉक्स के साथ इस तरह पेश किया गया है कि ग्राहक आकर्षित हों और इसे एक प्रीमियम स्मार्टफोन के तौर पर घर ले जाएं।

कूलपैड के इस डिवाइस में हाल ही में पेश किए गए ऐप्पल और एचटीसी स्मार्टफोन का असर साफ देखा जा सकता है। हमारी रिव्यू यूनिट रॉयल गोल्ड कलर थी। इसके अलावा यह फोन रोज गोल्ड कलर वेरिएंट में भी उपलब्ध है। लेकिन भारत में इसका नेचुरल ग्रे वेरिएंट लॉन्च नहीं किया गया है जिससे कुछ ग्राहकों को निराशा हो सकती है। कम कीमत वाले अधिकतर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में आजकल इस डिजाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है। फोन के अगले हिस्से में सुरक्षा के लिए गोरिल्ला ग्लास 4 दिया गया है। ग्लास खासा रिफेलक्टिव है और फोन के किनारे हर बार फोन के घूमने पर खासा चमकते हैं जो थो़ड़ा परेशान करने वाला हो सकता है। स्क्रीन के ऊपर ईयरपीस ग्रिल, फ्रंट कैमरा और सेंसर विंडो है जबकि नीचे की जगह खाली है। नेविगेशन बटन ऑनस्क्रीन हैं।
 

फोन में दायीं तरफ प़वर बटन और हाइब्रिड सिम/माइक्रोएसडी ट्रे दी गई है। फोन में एक सिम और एक सिम या माइक्रोएसडी कार्ड में से किसी एक का चुनाव करना पड़ेगा। बायीं तरफ वॉल्यूम बटन दिए गए हैं। सबसे ऊपर 3.5 एमएम ऑडियो शॉकेट और सबसे नीचे की तरफ एक माइक्रो-यूएसबी पोर्ट है जो दो ग्रिल से घिरा हुआ है। जिनमें से सिर्फ एक ही स्पीकर है।

फोन का रियर पैनल मैट मेटल का बना है जो अच्छा अहसास देता है लेकिन इस पर एक बड़ा सफेद स्टिकर पर चिपका है जिस पर नियामक जानकारी दी गई है। हमारी रिव्यू यूनिट मुड़ी हुई थी जिससे फोन का पूरा लुक खराब हो गया था। स्टिकर के ऊपर एक गोल फिगंरप्रिंट सेंसर दिया गया है जिसके चारों तरफ एक चमकदार रिंग है। रियर पर ऊपर दायीं तरफ एक कैमरा है जिसके एक तरफ टू-टोन फ्लैश और दूसरे तरफ माइक के लिए एक छेद है।  
 

फोन पकड़ने में खासा सुविधाजनक है हालांकि किनारों को थोड़ा और गोल बनाकर ज्यादा बेहतर किया जा सकता था। फोन थोड़ा भारी है और इसका वजन 170 ग्राम है। फोन का रियर थोड़ा स्लिपरी है। प्लास्टिक के प्रोटेक्टिव केस के साथ हमें फोन पकड़ने में खासा बेहतर लगा। कुल मिलाकर, कूलपैड मैक्स निश्चित तौर पर एक प्रीमियम लुक वाला स्मार्टफोन है लेकिन इस कीमत पर आने वाला सबसे आकर्षक फोन नहीं है।

स्पेसिफिकेशन
कूलपैड मैक्स को कूलपैड ए8 भी कहा जारहा है। यह फोन अलग-अलग देशों में अलग-अलग हार्डवेयर के साथ उपलब्ध है। हमारी रिव्यू यूनिट भारत में लॉन्च हुए वेरिएंट था जो 1.5 गीगाहर्ट्ज़ ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 617 प्रोसेसर, 4 जीबी रैम और 64 जीबी के इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। इस कीमत पर प्रोसेसर को थोड़ा कमजोर कहा जा सकता है लेकिन स्टोरेज व रैम उम्मीद से ज्यादा बेहतर हैं।
 

फोन में 1080×1920 पिक्सल रिजॉल्यूशन वाला 5.5 इंच का स्क्रीन है जो इन दिनों आरहे इस कीमत के फोन के हिसाब से अच्छी है। कूलपैड मैक्स में डुअल-टोन फ्लैश और फेज-डिटेक्शन ऑटोफोकस के साथ 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है। फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल है। दोनों कैमरों से 1080 पिक्सल तक की रिकॉर्डिंग की जा सकती है। फोन में 2800 एमएएच की बैटरी दी गई है जो नॉन-रिमूवेबल है। बैटरी क्वालकॉम की क्विक चार्ज 3.0 तकनीक को सपोर्ट करती है और कंपनी का वादा है कि 5 मिनट की चार्जिंग में ही फोन से 3 घंटे तक का टॉकटाइम मिल सकता है।

फोन में दोनों सिम पर भारतीय बैंड 3 और 40 एलटीई सपोर्ट मिलता है। कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई एसी, ब्लूटूथ 4.0, ए-जीपीएस, एफएम रेडियो और यूएसबी ओटीजी दिए गए हैं। फोन में माइक्रोएसडी कार्ड से सिर्फ 64 जीबी स्टोरेज ही बढ़ाई जा सकती है। दूसरे फोन में मिलने वाले एनएफसी और इन्फ्रारेड सपोर्ट कूलपैड मैक्स में नहीं हैं।
 

कुल मिलाकर, कूलपैड मैक्स में प्रोसेसर को छोड़कर दमदार स्पेसिफिकेशन दिए गए है। कूलपैड मैक्स में दिया गया प्रोसेसर आज कम कीमत में आ रहे फोन में दिया जा रहा है। कूलपैड का यह फोन आज 40,000 रुपये से ज्यादा कीमत में मिलने वाले अधिकर फ्लैगशिप स्मार्टफोन को कड़ी टक्कर दे सकताहै। कूलपैड को पूरी उम्मीद है कि मैक्स के सॉफ्टवेयर फीचक, बनावट और डिजाइन ग्राहकों को आकर्षित करेंगे। हालांकि, अगर आप 4के वीडियो रिकॉर्डिंग और 3डी गेम फीचर की तलाश में हैं तो उसके लिए आपको कोई और विकल्प तलाशना पड़ेगा।

सॉफ्टवेयर
एंड्रॉयड 5.1 लॉलीपॉप के ऊपर कूलपैड के कूल यूआई से काफी अच्छा कस्टमाइजेशन किया जा सकता है। इसमें कुछ बेहद अच्छे फीचर हैं तो कुछ अजीबोगरीब फीचर भी दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर डिफॉल्ट स्किन पूरी तरह से सेपिया-टोन पर आधारित है जो थोड़ी बहुत गोल्ड बॉडी से मिलती-जुलती है लेकिन इससे ऐप आइकन को पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है। हमें फोन का यह लुक पसंद नहीं आया और कुछ ज्यादा बेहतर पाने के लिए थीम ऐप में जाना पड़ा। सभी ऐप आइकन और विज़ट होमस्क्रीन के नीचे दिए गए हैं और कूलपैड के दूसरे डिवाइस की तरह इस फोन में ऐप ड्रॉयर के साथ कोई ‘ट्रेडिशनल मोड’ मौजूद नहीं है। इसके अलावा चीनी से अंग्रेजी में अनुवाद किए जाने की वजह से कुछ कन्फ्यूज करने वाले टेक्स्ट लेबल भी हैं।
 

फोन का डायलर, कॉन्टेक्ट लिस्ट और मैसेजिंग फक्शन एक टैब इंटरफेस के साथ सिंगल ऐप में मिला दिए गए हैं। यह कोई बड़ी परेशानी नहीं है लेकिन पहली बार इस्तेमाल करने में यह थोड़ा अजीब जरूर है। फोन डिफॉल्ट कीबोर्ड टचपल 2015 दिया गया है जिसमें की सारे प्रीसेट फ्रेज, एक फुल-स्क्रीन मोड और एक ऑप्शनल टी9 लेआउट है। इसके अलावा गूगल का हिंदी/हिंग्लिश कीबोर्ड भी मिलेगा।

फोन में कुछ प्री-इंस्टॉल ऐप भी आते हैँ। कूल मैनेजर से रैम खाली करना, डेटा यूजेज़ का पता करना, पॉवर खपत को मॉनिटर करना और ऐप परमिशन ट्वीक जैसे काम किए जा सकते हैं। इसके अलावा चुनिंदा कॉलर को ब्लॉक भी किया जा सकता है। फिंगरप्रिंट से ऐप लॉक कर सकते हैं और कूल सर्विस नाम के ऐप से मैप से ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर को खोज उन्हें कॉल की जा सकती है।
 

सेटिंग ऐप में कुछ दूसरे छोटे मजेदार फीचर हैं। स्प्लिट-स्क्रीन मोड को इनेबल कर आप एक ऐप को दो इंडिपेंडेट फ्रेम में चला सकते हैं। इसके अलावा ऑनस्क्रीन नेविगेशन बटन का कलर व लेआउट भी बदला जा सकता है। अगर आपको लगता है कि आपकी उंगली से एक बार में पहुंचने के लिए स्क्रीन बहुत दूर है तो आप फ्लोटिंग बटन को इनेबल कर सकते हैं जिससे एक सर्कुलर मेन्यू आ जाता है जिसमें कई कंट्रोल विकल्प मिलते हैँ। ज़ेन मोड में ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ फीचर शेड्यूल है जिस जरूरी कॉन्टेक्ट या अलर्ट के लिए हटा सकते हैं।

एक चीज जो थोड़ा परेशान करता है वो है आप एक पासकोड या फिंगरप्रिंट से आसानी से निजी चीजों को सुरक्षित नहीं कर सकते हैं। सेटिंग ऐप का स्पेस मैनेजमेंट सेक्शन प्रोटेक्टेड है और इससे आप डॉक आइकन व क्विक सेटिंग बार छिपा सकते हैं। इसके बाद फिंगरप्रिंट मैनेजमेंट ऐप में जाकर अपना फिंगरप्रिंट रजिस्टर्ड कर सकते हैं।
 

बात करें सैमसंग, ब्लैकबेरी और नोकिया तो वो यूजर का वर्क और पर्सनल डेटा अगल रखने के लिए इस तरह के फीचर का इस्तेमाल कर चुकी हैं। ऐसा लगता है कि कूलपैड द्वारा लागू किए गए इस फीचरो को कॉरपोरेट डेटा सिक्योरिटी से ज्यादा निजी डेटा सुरक्षा के लिए लाया गया है। यह फीचर ग्रेफाइट सॉफ्टवेयर डेवलेपर के सिक्योर स्पेस पर आधारित है। लेकिन इसमें सभी फीचर शामिल नहीं है।
 

परफॉर्मेंस
कूलपैड मैक्स अधिकतर जगह शानदार प्रतिक्रिया देता है लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर यह खासा गर्म हो जाता है। सामान्य इस्तेमाल के समय भी कुछ देर बाद ही फोन गर्म होने लगता है। फोन में सब कुछ शानदार तरीके से चलता है लेकिन गेम खेलते समय फोन पकड़ने में सुविधाजनक नहीं लगता। इसके अलावा फोन हर जगह बेहतर काम करता है।
 

फोन का स्क्रीन शार्प और चमकदार है व कलर खासे असरदार नज़र आते हैं। गेम और मूवी का बेहतर मजा लिया जा सकता है सिवाय स्क्रीन के किनारों पर होने वाले रिफलेक्शन के। साधारण इस्तेमाल के लिए स्पीकर काफी लाउड है और फोन के साथ आने वाले हेडसेट (जो ऐप्पल के ईयरपॉड की तरह दिखता है) को म्यूजिक के हिसाब से ठीक कहा जा सकता है।

फोन में फिंगरप्रिंट रीडर काफी तेजी से काम करता है लेकिन हर बार यह सही प्रतिक्रिया नहीं देता। पहली बार से ज्यादा दूसरी बार कोशिश करने पर यह काम करता है। स्पेसेज़ के बीच स्विच करने पर करीब 10 सेकेंड लगते हैं और जिस कंपनी ने कूलपैड को लाइसेंस दिया है उसका कहना है कि इससे परफॉर्मेंस पर बेहद कम असर पड़ता है। प्राइवेट स्पेस के साथ हमें फोन की परफॉर्मेंस में कोई खास फर्क दिखाई नहीं दिया।
 

बेंचमार्किंग टेस्ट में हमें फोन से ठीकठाक आंकड़े मिले। ग्राफिक्स स्कोर थोड़ा कमजोर रहा। इसके अलावा हाल ही में लॉन्च हुए कम कीमत वाले लेनोवो ज़ूक ज़ेड1 (रिव्यू) और मोटो जी4 प्लस (रिव्यू) के बराबर ही आंकड़े मिले।

कूलपैड मैक्स का कैमरा खासा अच्छा है औरतस्वीरें साफ व नॉयस के बिना आती हैं। इसके साथ ही टेक्सचर भी अच्छा आता है। क्लोज़-अप शॉट में फील्ड इफेक्ट भी डेप्थ के साथ आते हैं। लेकिन फोकस लॉक करते समय परेशानी होती है जिससे अच्छी रोशनी में भी ली गईं तस्वीरें भद्दी आईं। कम रोशनी में भी फोन से अच्छी तस्वीरें ली जा सकती हैं। लेकिर तस्वीरों के भद्देपन की समस्या यहां भी होती है। 1080 पिक्सल पर रिकॉर्ड की जाने वाली वीडियो ठीकठाक है लेकिन थोड़ी डल दिखती है।
 

हमारे वीडियो लूप टेस्ट में फोन की बैटरी ने 8 घंटे 41 मिनट तक साथ दिया। सामान्य इस्तेमाल के दौरान हम फोन को एक दिन तक चला पाए और क्विक चार्ज फीचर बेहद काम का है। आपको फोन को पूरे दिन चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती और सिर्फ कुछ मिनटों में ही पूरा फोन चार्ज हो जाता है।

हमारा फैसला
कूलपैड निश्चित तौर पर भारत में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। कूलपैड मैक्स एक अच्छा फोन है लेकिन इसका बहुत ज्यादा गर्म होना और इसकी ज्यादा कीमत एक बड़ी समस्या है। शायद प्राइवेट स्पेस फीचर और डिजाइन की वजह से फोन की कीमत ज्यादा है।
 

प्राइवेट स्पेस फीचर अच्छा है लेकिन फोन में एक अलग प्राइवेसी सॉल्यूशन नहीं है जिससे जब आपके ऑफिस में आईटी एडमिनिस्ट्रेटर संवेदनशील जानकारी और नीति मैनेज करे तो अपनी निज़ी डेटा को मैनेज कर सकें।

फीचर की बात करें तो, इस फोन में आपको इसी कीमत वाले सैमसंग गैलेक्सी ए5 (2016) (रिव्यू) से ज्यादा बेहतर फीचर मिलते हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कम कीमत वाले दूसरे फोन में भी आपको यही फीचर मिल जाते हैं भले ही उनका लुक प्रीमियम ना हो। अगर आप शानदार फीचर और अच्छे पैसे खर्च करना चाहते हैं तो कूलपैड मैक्स चुन सकते हैं लेकिन अगर आपको लगता है कि आप कूलपैड मैक्स के अनोखे फीचर के बिना रह सकते हैं तो आप अपने थोड़े पैसे तो बचा ही सकते हैं।



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